वर्षा जल संचयन( रेन वाटर हार्वेस्टिंग )

वर्षा जल संचयन (अंग्रेज़ी: वाटर हार्वेस्टिंग ) वर्षा के जल को किसी खास माध्यम से संचय करने या इकट्ठा करने की प्रक्रिया को कहा जाता है। विश्व भर में पेयजल की कमी एक संकट बनती जा रही है। इसका कारण पृथ्वी के जलस्तर का लगातार नीचे जाना भी है। इसके लिये अधिशेष मानसून अपवाह जो बहकर सागर में मिल जाता है, उसका संचयन और पुनर्भरण किया जाना आवश्यक है, ताकि भूजल संसाधनों का संवर्धन हो पाये। अकेले भारत में ही व्यवहार्य भूजल भण्डारण का आकलन 214 बिलियन घन मी. (बीसीएम) के रूप में किया गया है जिसमें से 160 बीसीएम की पुन: प्राप्ति हो सकती है। इस समस्या का एक समाधान जल संचयन है। पशुओं के पीने के पानी की उपलब्धता, फसलों की सिंचाई के विकल्प के रूप में जल संचयन प्रणाली को विश्वव्यापी तौर पर अपनाया जा रहा है। जल संचयन प्रणाली उन स्थानों के लिए उचित है, जहां प्रतिवर्ष न्यूनतम 200 मिमी वर्षा होती हो। इस प्रणाली का खर्च 400 वर्ग इकाई में नया घर बनाते समय लगभग बारह से पंद्रह सौ रुपए मात्र तक आता है।

छत पर प्राप्त वर्षा को संचयन करने के लाभ 

  • जहां जल की अपर्याप्त आपूर्ति होती है या सतही संसाधन का या तो अभाव है या पर्याप्त नहीं है, वहां यह जल समस्या का आदर्श समाधान हैं।• वर्षा जल जीवाणुओं रहित, खनिज पदार्थ मुक्त तथा हल्का होता है।• यह बाढ़ जैसी आपदा को कम करता है।• भूमि जल की गुणवत्ता को, विशेष तौर पर जिसमें फ्लोराइड तथा नाइट्रेट हो, द्रवीकरण के द्वारा सुधारता है।• सीवेज तथा गन्दे पानी में उत्पन्न जीवाणु अन्य अशुद्धियों को समाप्त/कम करता है जिससे कि जल पुन: उपयोगी बनता है।• वर्षा जल का संचयन जरूरत के स्थान पर किया जा सकता है तथा जरूरत के समय इसका प्रयोग कर सकते है।• वर्षा जल के संचयन के लिए यह प्रणाली काफी सरल, सस्ती एवं पर्यावरण के अनुकूल है।

    • शहरी क्षेत्रों में जहाँ पर शहरी क्रियाकलापों में वृद्धि के कारण भूमि जल के प्राकृतिक पुनर्भरण मे तेजी से कमी आई है तथा कृत्रिम पुनर्भरण उपायों को क्रियान्वित करने के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं है, भूमि जल भण्डारण का यह एक उचित विकल्प है।

 

रुफटोप वर्षा जल संचयन : कैसे करें

छत पर प्राप्त वर्षा जल का भूमि जलाशयों में पुनर्भरण निम्नलिखित संरचनाओं द्वारा किया जा सकता है।

1. बंद / बेकार पड़े कुंए द्वारा
2. बंद पड़े/चालू नलकूप (हैंड पम्प) द्वारा
3. पुनर्भरण पिट (गङ्ढा) द्वारा
4. पुनर्भरण खाई द्वारा
5. गुरुत्वीय शीर्ष पुनर्भरण कुँए द्वारा
6. पुनर्भरण शिफ्ट द्वारा

1) गुरुत्वीय शीर्ष पुनर्भरण कुँए द्वारा

बोरवेल / नल कूपों का इस्तेमाल पुनर्भरण संरचना के रूप में किया जा सकता है।


यह विधि वहाँ उपयोगी है जहाँ जमीन की उपलब्धता सीमित है। जब जलाभृत गहरा हो तथा चिकनी मिट्टी से ढका हो। छत पर वर्षा जल लगातार इससे पहुंचता है तथा गुरुत्वीय बहाव द्वारा पुनर्भरण होता है। पुनर्भरण जल गाद मुक्त होना चाहिए। इसे पानी की निकासी के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है। उस क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी है जहां भूमि जलस्तर नीचे है। पूनर्भरण संरचनाओं की संख्या इमारतों के चारों ओर के सीमित क्षेत्र तथा छत के ऊपर के क्षेत्रफल को ध्यान में रखकर तथा जलाभृत के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए निश्चित की जा सकती है।

2) पुनर्भरण खाई द्वारा

इसका निर्माण तब करते है जब जलाभृत छिछले गहराई में ही उपलब्ध हो।

यह छिछले गहराई की खाई शिलाखंड तथा रोड़ी से भरी होती है। इसका निर्माण जमीन की ढलान के आर-पार किया जाता है। छत क्षेत्र तथा जमीन की उपलब्धता के आधार पर खाई 0.5 से 1 मी. चौड़ी 1 से 1.5 मी. गहरी तथा 10 से 20 मी. लम्बी हो सकती है। यह ऐसे भवन के लिए उपयुक्त है जिसका छत क्षेत्र 200 से 300 वर्ग मी. है। खाई की सफाई समय-समय पर होनी चाहिए।

3) बंद /बेकार पडे क़ुएं द्वारा
सूखे अनुपयोगी कूप का उपयोग पुनर्भरण संरचना के रूप् में कर सकते है। पुनर्भरित किए जा रहे वर्षा जल को एक पाईप के माध्यम से कुएं के तल या उसके जल स्तर के नीचे ले जाया जाता है ताकि कुएं के तल में गङ्ढे होने व जलाभृत में हवा के बुलबुलों को फंसने से रोका जा सके।

कूप को पुनर्भरण संरचना के रूप् में इस्तेमाल से पहले, इसका तल साफ होना चाहिए तथा सभी निक्षेप को हटा लेना चाहिए। पुनर्भरण जल गाद मुक्त होना चाहिए। कुएं को नियमित रूप से साफ करना चाहिए। यह विधि बड़े भवन के लिए उपयुक्त है जिनका छत को क्षेत्र 1000 वर्ग मी. से अधिक है। जीवाणु-संदूषक को नियंत्रित करने के लिए क्लोरीन आवधिक रूप से डालनी चाहिए।

4) पुनर्भरण शाफ्ट द्वारा

पुनर्भरण शाफ्ट हाथों द्वारा अथवा रिवर्स / डायरेक्टरी प्रक्रिया द्वारा खोदी जाती है।
पुनर्भरण शाफ्ट का व्यास 0.5 – 3 मीटर तक हो सकता है , जो कि पुनर्भरित किये जाने वाले पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

इसका निर्माण वहां किया जाता है जहाँ छिछला जलाभृत चिकनी मिट्टी की सतह के नीचे हो।
पुनर्भरण शाफ्ट का निचला तल पारगम्य संरचना जैसे बालू रेत में होना चाहिए। पुनर्भरण शाफ्ट की गहराई भूमि स्तर के नीचे 10 से 15 मी. तक हो सकती है। सुरक्षा की दृष्टि से पुनर्भरण शाफ्ट का निर्माण भवनों से 10 से 15 मी. की दूरी पर होना चाहिए। शाफ्ट के ऊपर से रेत की परत को हटाकर इसे नियमित रूप से साफ करना चाहिए तथा दोबारा भरना चाहिए।

5) पुनर्भरण पिट (गङ्ढा) द्वारा

पुनर्भरण पीट का निर्माण छिछले जलाभृत को पुनर्भरण करने के लिए होता है। इसका निर्माण समान्यत: 1 से 2 मी. चौड़ा तथा 2 से 3 मी. गहरा किया जाता है। खुदाई करने के पश्चात गड्ढे को शिलाखण्ड, रोड़ी व बजरी से भरा जाता है और ऊपर से रेत डाल दी जाती है।पुनर्भरण जल गाद मुक्त होना चाहिए।
यह छोटे भवन के लिए उपयुक्त है जिसका छत क्षेत्रफल लगभग 100 वर्ग मी. तक हो। पुनर्भरण गड्ढ़ा किसी भी आकार में हो सकता है जैसे गोलाकार, वर्गाकारा, आयातकार। अगर गङ्ढे के आकार समलम्बी हो तो किनारों की ढलान काफी तीव्र होना चाहिए ताकि गाद जमा न हो सकें।

6) बंद पड़े / चालू नलकूप (हैडपंप) द्वारा

बंद पडे / चालू नलकूप का उपयोग पुनर्भरण में कर सकते है। यह संरचना छोटे भवन के लिए उपयुक्त है जिसका छत का क्षेत्रफल लगभग 150 वर्ग मी तक हो। पानी को छत में हैंडपम्प तक 50 से 100 मिमी व्यास वाले पाइप द्वारा पहुंचाया जाता है। चालू हैंडपम्प के चूशन पाइप में हवा के प्रवेश को रोकने के लिए हैडपम्प के निकट जल प्रवाह प्रणाली मे बाल्व लगाया जाता है। पुनर्भरण जल गाद मुक्त होना चाहिए।

 

 

 

 

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